चुनाव

इन दो सीटों को लेकर कांग्रेस हाईकमान असमंजस में, समझिए इनका गणित

बालाघाट। जिले की 6 विधानसभाओं में से 4 विधानसभा में कांग्रेस के 3 विधायकों की टिकट तो पक्की है, वहीं वारासिवनी विधानसभा क्षेत्र में पूर्व विधायक गुड्डा जायसवाल अपने इलाके में काफी समय से सक्रिय होकर काम कर रहे हैं।

साथ ही यहां से उनकी जीत भी सुनिश्चित मानी जा रही है। लेकिन जिले की 2 विधानसभा बालाघाट और कटंगी में टिकट को लेकर अभी भी कांग्रेस हाईकमान असमंजस की स्थिति बनी है।

जिले के तीनों कांग्रेसी विधायक अपनी अपनी सीट बचाने ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, और जनता के बीच में जाकर भाजपा सरकार की विफलता, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं।

बालाघाट और कटंगी विधानसभा में प्रत्याशी निश्चित नहीं होने के कारण दोनों विधानसभाओं के प्रबल दावेदार खुलकर आने वाले चुनाव के लिए अपनी पकड़ मजबूत करने मेहनत नहीं कर पा रहे हैं। यह विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए कड़ी परीक्षा से कम नहीं होगा।

कांग्रेस में ऐसा कम ही होता है कि चुनाव करीब हो और उम्मीदवार तय हो जाए। आम तौर पर टिकट को लेकर दावेदारों के बीच ऐन वक्त तक घमासान होता रहता है। लेकिन देखा जाए तो इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी तय करने को लेकर लेट लतीफी कर जोखिम उठाने को तैयार नजर नहीं आ रही है।

इसके बावजूद भी बालाघाट और कटंगी के लिए प्रत्याशी चयन करने में कांग्रेस की तरफ से की जा रही देरी चर्चा में है। जिला किांग्रेस पर्यवेक्षक जनक कुशवाह कई महीनों से बालाघाट में डेरा डाले हुए हैं और विधानसभा की मैदानी स्थिति से हाईकमान को भी अवगत करा रहे हैं।

समय पर टिकट नहीं मिलने से उम्मीदवार को चुनाव लड़ने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है ऐसे में अगर दावेदार को इशारा और विश्वास दिलाया जाए तो वह चुनाव से काफी पहले ही अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में पूर्ण रूप से सक्रिय होकर माहौल अपने पक्ष में करने का प्रयास कर सकते हैं।

बालाघाट और कटंगी विधानसभा में देरी से प्रत्याशी घोषित करके टिकट देने से कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। इसके लिए हर हाल में दोनों विधानसभा सीट पर जल्द उम्मीदवार तय कर लिया जाता है तो ही कांग्रेस यहां पर भाजपा को टक्कर देने की स्थिति में आ सकती है।

प्रदेश प्रभारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव दीपक बावरिया गुजरात से हैं और वे गुजरात विधानसभा के चुनाव देख चुके हैं जहां देरी से टिकट बंटे और वहां माहौल तैयार करने में कांग्रेस को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश में लाना नहीं चाहते हैं और इस बात का संकेत उन्होंने अपने वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को भी वन टू वन चर्चा में दे चुके हैं ताकि दावेदारों से मेन मुलाकात की प्रक्रिया जल्द शुरू हो और कांग्रेस अपनी मैदानी स्थिति की पकड़ और मजबूत कर सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *