loksabha election 2019
चुनाव

टिकट नहीं मिलने पर भाजपा से बगावत कर कांग्रेस का ‘हाथ’ थाम सकते हैं बोधसिंह भगत

बालाघाट। बालाघाट-सिवनी संसदीय सीट में लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों ही प्रमुख पार्टियों में प्रत्याशी चयन और टिकट वितरण को लेकर भारी उथापोह देखने को मिल रही है। लोकसभा चुनाव प्रत्याशियों के नाम को लेकर चयन के लिए स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक 13 मार्च गुरूवार को होनी थी, लेकिन इस अहम बैठक की तारिख को आगे बढ़ा दिया गया है। इस बैठक में मुख्य रूप से जबलपुर, मंडला और बालाघाट की लोकसभा सीटों पर विचार मंथन होना था। इसी बीच सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा के चार विधायक लगातार कमलनाथ के संपर्क में बने हुए हैं। जो कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। इनके कांग्रेस में शामिल होने के बाद बालाघाट लोकसभा सीट से इन्हें उम्मीदवार बनाए जाने पर कांग्रेस विचार कर सकती है तो वहीं कमलनाथ के काफी करीबी और उनके लिए अपने विधानसभा सीट छोड़ने वाले दीपक सक्सेना का नाम भी यहां के लिए उछाला जा रहा है।

दीपक सक्सेना को बालाघाट-सिवनी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चाओं को वरिष्ठ राजनीतिक कोई हवा नहीं दे रहे हैं। राजनीतिक सूत्र बताते हैं कि विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कांवरे द्वारा अपने छोटे भाई पवन कांवरे के लिए टिकट मांग रही हैं और वर्तमान में इस संसदीय क्षेत्र की जनता और कांग्रेस के अधिकतर कार्यकर्ताओं में पवन कांवरे को लेकर काफी विरोध है। इस विरोध को दबाने और पैराशूट उम्मीदवार को यहां स्थापित करने के लिए जबरन दीपक सक्सेना का नाम उछाला जा रहा है। दीपक सक्सेना का नाम सामने आने से बाहरी प्रत्याशी बताकर जनता और कार्यकर्ताओं के बीच इनका विरोध करवाया जाएगा, ताकि पवन कांवरे के हो रहे विरोध को दबाया जा सके।

वहीं दूसरी जानकारी के अनुसार, लोकसभा चुनाव के लिए आरएसएस ने भी सात सीटों पर अपनी तरफ से नाम तय किए हैं जिन्हें उम्मीदवार बनाने के लिए संघ भाजपा से कह चुका है, भाजपा को इसके लिए नेताओं और सीटों के बारे में सारी जानकारी भी दे दी गई है। इस पर अमल करने के लिए भाजपा के पार्टी संगठन ने संघ को आश्वस्त भी कर दिया है। संघ द्वारा सुझाए गए सात सीटों के सात नामो में बालाघाट सिवनी लोकसभा सीट से विधायक और पूर्व कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन का नाम शामिल है। सूत्र बताते हैं कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आरएसएस द्वारा कराए गए अंदरूनी सर्वे में वर्तमान भाजपा सांसद बोधसिंह भगत की स्थिति काफी कमजोर है, जनता के बीच इनकी लोकप्रियता काफी कम नजर आई थी, अगर इन्हें दोबारा मौका दिया जाता है तो भाजपा को इस संसदीय क्षेत्र से हार का सामना करना पड़ सकता है, दूसरी तरफ पूर्व कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन की लोकप्रियता जनाधार में पहले से और बेहतर सुधार आया है।

पूर्व कृषि मंत्री बिसेन संघ के अंदरूनी सर्वे के अनुसार, बालाघाट-सिवनी संसदीय क्षेत्र से भाजपा के जिताऊ प्रत्याशी साबित हो सकते हैं, इसलिए संघ ने बालाघाट विधायक और पूर्व कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन का नाम भाजपा संघटन को पूरी जिम्मेदारी से सुझाया है, जिस पर मुहर लगना लगभग तय भी माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, अगर भाजपा इस संसदीय सीट से यहां के वर्तमान सांसद बोधसिंह भगत की टिकट काटकर गौरीशंकर बिसेन को उम्मीदवार बनाती है तो बोधसिंह भगत ऐसी स्थिति में चुप नहीं बैठेंगे और भाजपा से खुलकर बगावत करते हुए कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं, कांग्रेस इसके बदले में उन्हें यहां से अपनी पार्टी का टिकट दे सकती है। इसके लिए वर्तमान सांसद बोधसिंह भगत गोंदिया के कद्दावर नेता नानाभाउ पटोले से सीधे संपर्क में बने हुए हैं और पटोले इसके लिए लाबिंग करने में भी जुट चुके हैं।

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ज्ञात हो, कि विगत विधानसभा चुनाव में भाजपा के संजय मसानी ने अचानक कमलनाथ के सामने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करते हुए कांग्रेस में शामिल हुए और उन्हें वारासिवनी विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी बनाया गया है। इसके पीछे भी नानाभाऊ पटोले की अहम भूमिका थी। नानाभाऊ पटोले कमलनाथ ही नहीं बल्कि राहुल गांधी के भी विश्वास पात्र और बहुत करीबी माने जाते हैं, सीधे संपर्क में हैं। हालांकि इस राजनीतिक ताने-बाने की सच्चाई आने-वाले कुछ दिनो में ही साफ हो पाएगी। अगर परिस्थितियां वर्तमान दावेदारों के पक्ष में रहीं तो भाजपा से बोधसिंहभगत गौरीशंकर बिसेन मौसम हरिनखेड़े गौरव पारधी और कांग्रेस से शेषराम रांहगडाले, विशाल बिसेन, विक्की पटेल, मधु भगत, पवन कांवरे, विश्वेश्वर भगत, नितिन भोज, इन्ही नामों में से किसी एक पर दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियां अपना प्रत्याशी तय करेंगी।

रिपोर्ट: रितेश सोनी

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