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हैदराबाद: मक्का मस्जिद में ब्लास्ट केस के सभी आरोपी बरी, फैसला देने वाले जज ने दिया इस्तीफा

हैदराबाद के मक्का मस्जिद में ब्लास्ट मामले में फैसला आ गया है। मामले में कोर्ट ने स्वामी असीमानंद और चार अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। वहीं सोमवार को देर शाम फैसला सुनाने वाले स्पेशल एनआईए जज रवींद्र रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया।

फैसले पर गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आरवीएस मणि ने बताया कि ब्लास्ट केस के सारे सबूत झूठे थे। इसमें हिंदू आतंकवाद जैसी कोई बात नहीं थी। मामले में कांग्रेस ने भ्रम फैलकर लोगों की छवि खराब की थी।

आपको बता दें कि 18 मई 2007 को जुमे की नमाज के वक्त एक बड़ा धमाका हुआ था। ब्लास्ट में 9 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि करीब 58 लोग घायल हो गए थे। पहले मामले की सीबीआई ने जांच की और फिर 2011 में एनआईए को ट्रांसफर किया गया था।

फैसले के बाद असीमानंद के वकील ने बताया कि अभियोजन मुकदमे का सामना करने वाले पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहे। इसलिए कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट में सुनवाई के वक्त 226 चश्मदीदों से पूछताछ की गई इनमें से 54 गवाह मुकर चुके हैं। करीब 411 दस्तावेज पेश किए गए थे।

आपको बता दें कि मालेगांव धमाकों के आरोपी कर्नल पुरोहित भी इस मामले में गवाह थे। कर्नल पुरोहित 15 फरवरी 2018 को अपने बयान पलट दिए थे। स्वामी असीमानंद और भरत मोहनलाल रातेश्वर जमानत पर हैं जबकि तीन अन्य इस
समय न्यायिक हिरासत में केन्द्रीय जेल में हैं।

गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आरवीएस मणि ने कहा कि मुझे ऐसे ही फैसले की उम्मीद थी। सारे सबूत मनगढ़ंत थे, ब्लास्ट केस में हिंदू आतंकवाद जैसा कोई बात नहीं थी। मामले में जिन लोगों की छवि खराब हुई है, उसकी भरपाई कैसे होगी। कोर्ट के फैसले पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अब यह केंद्र सरकार पर निर्भर है कि वो ब्लास्ट केस में आरोपियों को बरी करने वाले फैसले को चुनौती दे या नहीं। इसलिए मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।

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