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कूड़ा बीनने वाले के बेटे की सीएम भरेंगे फीस, आशाराम ने पास किया पहली बार में एम्स एग्जाम




देवास। अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कामयाबी कदम चूमती है। इस कहावत को मध्य प्रदेश के रहने वाले एक युवक ने सच कर दिखाया है।




जी हां युवक का नाम है आशाराम चौधरी। युवक के पिता का काम है कूड़ा बीनना। इस युवक ने एम्स की प्रवेश परीक्षा को पहले प्रयास में पास की है।

मध्यप्रदेश के देवास जिले के रहने वाले एक शख्स जो कूड़ा बीनकर अपने परिवार का पालन पोषण करता है, उसके बेटे ने पहले ही प्रयास में एम्स की प्रवेश परीक्षा को पहले पास कर लिया।

लेकिन फीस भरने के लिए उसके परिवार के पास पैसे नहीं है, ऐसे में आशाराम की दास्तां को ट्वीटर पर शेयर किया गया।

चंदर भारद्वाज नाम के शख्स ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि ‘प्रकाश जावड़ेकर, नरेंद्र मोदी कृपया देवास से 40 किलोमीटर दूर स्थित विजयगंज मंडी गांव के आशाराम चौधरी की मदद कीजिए, जोकि कूड़ा बीनने वाला का बेटा है।

उसने पहले प्रयास में ही एम्स की प्रवेश परीक्षा पास कर ली है, लेकिन उसके पास फीस भरने के रुपये नहीं हैं’।

भारद्वाज के बाद एक और भैय्याजी स्पीक्स नाम के एक यूजर ने उनके ट्वीट को रीट्वीट करते हुए शिवराज सिंह चौहान से आशाराम की मदद करने की अपील भी की।

भैय्याजी ने लिखा कि, ‘शिवराज सिंह चौहान से विनती है कि वह इस ममाले में दखल दें और इस होनहार की मदद करें।’

कुछ देर बाद ही शिवराज सिंह ने इस ट्वीट का जवाब दिया। लिखा कि, ‘इस तरफ ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद।

मैंने देवास के कलेक्टर से तुरंत आर्थिक मदद देने के निर्देश दिए हैं, और वह अब आशाराम के संपर्क में हैं। आशाराम मेधावी विद्यार्थी योजना के पात्र हैं और हम उनकी फीस भरेंगे। मैं उससे खुद बात करूंगा और इस सफलता के लिए उन्हें बधाई दूंगा।’

इसके बाद आशाराम को लेकर शिवराज सिंह ने लिखा, ‘मुझे पता चला कि आशाराम के पास पक्का मकान भी नहीं है और उनके पास शौचालय और बिजली की सुविधा तक नहीं है।

शिवराज सिंह ने ट्वीटर पर लिखा कि हम उन्हें कई सरकारी योजनाओं के तहत यह सारी सुविधाएं देंगे। ‘देवास के कलेक्टर ने आशाराम को अपने कार्यालय में बुलाया और यहां उसे आर्थिक मदद का प्रमाणपत्र दिया।




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