मध्य प्रदेश

कांग्रेस-सपा गठबंधन से होगा बड़ा फायदा, हाईकमान पर टिकी नजरें

बालाघाट। विधानसभा चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहे हैं कांग्रेस गठबंधन को लेकर बातचीत तेज हो रही है। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ चुनाव से पहले व्यापक विपक्ष चाहते हैं इसलिये बसपा के अलावा मध्यप्रदेश के लिये सपा से भी गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है।

कांग्रेस चाहती है कि गठबंधन हो स्थिर हो,चुनाव के बाद मामला गड़बड़ न हो जाये। कर्नाटक चुनाव के बाद से ही कांग्रेस हर कदम फूंक फूंक कर रख रही है वहीं प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ भी इस बार गठबंधन के बाद टिकट वितरण को लेकर किसी प्रकार की गलती दोहराने या करने के मूंड में नहीं लग रहे हैं।

सपा के साथ गठबंधन के खबरों के बाद जिले की राजनीति में भी सरगर्मीयां तेज हो रही है। कांग्रेस कार्यकर्ता भी उम्मीदवारों के चयन को लेकर गंभीर दिखाई दे रहे हैं। जिले में परसवाड़ा और बालाघाट विधानसभा सीटों के लिये कई तरह के कयास लगाये जा रहे हैं।

जिले की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सपा और कांग्रेस दोनों मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो जिले में इसका फायदा कांग्रेस को जरूर मिल सकता है।

यही नहीं बल्कि लोकसभा सीट में भी कांग्रेस इस गठबंधन से जिले में पूरा फायदा उठा सकती है,अगर सबकुछ ठीक रहा तो कांग्रेस की जिले में सीटें बढ़ सकती है।

जिले में 6 विधानसभाओं में कांग्रेस 3 पर और भाजपा 3 पर काबिज़ है। कांग्रेस की 3 सीटों में परसवाड़ा को बचाना और बालाघाट की सीट को जीतना कांग्रेस के लिये चुनौती पूर्ण कार्य बन गया है।

ऐसे में सपा से गठबंधन पर विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनाव में जिले में कंकर मुंजारे कांग्रेस के लिये महत्वपूर्ण साबित हो सकते है।

जातिगत समीकरण के हिसाब से भी देखा जाये तो लोधी समाज से जिला कांग्रेस में कोई बड़ा पद अब तक नहीं दिया गया है।

कांग्रेस के पास लोकसभा के लिये फिलहाल कोई शसक्त उम्मीदवार भी नहीं है जो बीजेपी को टक्कर दे सके। ऐसी स्थिति में राजनीतिक परिदृश्य को जातिगत समीकरण और योग्य प्रत्याशी के रूप में देखा जाये तो परसवाड़ा के वर्तमान विधायक मधु भगत लोकसभा से कांग्रेस उम्मीदवार के लिये एकदम फीट बैठते हैं।

उन्होंने वर्षों पुरानी कांग्रेस की खोई हुई सीट परसवाड़ा से कांग्रेस की वापसी कराई थी। सपा कांग्रेस गठबंधन से कंकर मुंजारे परसवाड़ा के लिये सबसे बेहतर उम्मीदवार साबित होंगे और उनकी जीत लगभग तय मानी जा सकती है।

कंकर मुंजारे को परसवाड़ा से प्रत्याशी बनाये जाने पर इसका फायदा पूरे जिले के बाकी पांचों विधानसभाओं में भी होगा। श्रीमती मुंजारे इसी गठबंधन को नगरपालिका अध्यक्ष पद प्रत्याशी बनाया जाता है

तो वर्षों पुरानी नपा सीट भी गठबंधन के साथ कांग्रेस के खाते हैं जाने की पूरी उम्मीद है। श्रीमती मुंजारे नपा अध्यक्ष रह चुकी है इसलिये गठबंधन के तहत नपा अध्यक्ष पद के लिये श्रीमती मुंजारे नगरवासियों की पहली पसंद बन सकती है।

कंकरमुंजारे परसवाड़ा से तीन बार विधायक रह चुके हैं उन्होंने सांसद चुनाव भी जीता था,इसके अलावा अपने भाई को भी वे परसवाड़ा से विधायक बनवा चुके हैं।

अब अगर कांग्रेस सपा गठबंधन के बाद जिले में गठबंधन के तहत सीटों का बटवारा होता है तो दोनों पार्टी कार्यकर्ताओं और खुद कांग्रेस के लिये जिले में के वल उम्मीदवारों के चयन पर ही जीत निर्भर करती है।

सपा से गठबंधन के बाद जातिगत समीकरण एवं वरिष्ठ राजनीतिज्ञों के अनुसार भी लोकसभा के लिये मधुभगत,विधानसभा के लिये परसवाड़ा से कंकर मुंजारे,नपा अध्यक्ष पद के लिये श्रीमती अनुभा मुंजारे सबसे बेहतर जीताऊ प्रत्याशी साबित हो सकते हैं।

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