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सड़क निर्माण के लिए काटे गए सैकड़ों पेड़, फारेस्ट डिपो में जमा कराने की जगह इंदौर में की तस्करी

बालाघाट। एमपीआरडीसी के तहत लालबर्रा से समनापुर सड़क निर्माण का काम प्रगति पर है। 14 किमी. रोड बनाने के लिए एमपीआरडीसी द्वारा वीआरएस कंपनी को सड़क निर्माण का काम सौंपा गया है।

लालबर्रा से समनापुर तक बनने वाली सड़क के चौड़ीकरण के लिए 14 किमी का रोड दोनों किनारे पर सैकड़ों की संख्या में कई प्रताजियों के हरे भरे पेड़ लगे थे। जिन्हें काटकर नई सड़क का निर्माण करना था।

पेड़ों को काटाने के लिए वीआरएस कंपनी द्वारा लालबर्रा के ही आरबी टिम्बर्स को उक्त पेड़ों को काटने का टेंडर दिया गया था। वीआरएस कंपनी और आर बी टिम्बर्स के बीच करार हुआ था कि उक्त सभी पेड़ों की कटाई के बाद काटे गए।

पेड़ों को वन विभाग से इसका सत्यापन कराकर और हेमर लगवाकर गर्रा डिपो में जमा किए जाएंगे। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी गर्रा डिपो में काटे गए उक्त सैकड़ों पेड़ों को अब तक जमा नहीं कराया गया है। लालबर्रा से समनापुर तक की निर्माणाधीन 14 किमी. की दूरी में रोड के दोनों साइड आम, ईमली, आजन, नीम, सागौन समेत कई प्रजातियों के सैकड़ों की संख्या में पेड़ लगे हुए थे।

जिन्हें काटकर आरबी टिम्बर्स के द्वारा गर्रा डिपो में जमा नहीं कराया गया है बल्कि उक्त रोड़ निर्माण के दोनों साईड से काटे गये पेड़ों में से आधे से ज्यादा पेड़ गायब हो चुके हैं। एमआरडीसी ने इस मामले में आज तक कोई सुध नहीं ली और न ही रोड निर्माण कंपनी वीआरएस ने इस संबंध में कोई संज्ञान लिया है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आर बी टिम्बर्स द्वारा पेड़ों की कटाई के बाद सभी पेड़ों को गर्रा डिपो में जमा कराने के बजाय अधिकतर पेड़ों को अपने टिम्बर्स के नाम से इंदौर में 20 से 25 गाड़ी माल बेच दिया गया है। जिसमें एमपीआरडीसी के अधिकारियों वीआरएस कंपनी दोनों से मिली भगत कर उक्त कार्य को अंजाम दिया गया है।

अब संबंधित विभाग और वीआरएस कंपनी इस मामले में लीपा-पोती करने में लगी है। इस संबंध में आरबी टिम्बर्स संचालक द्वारा बोला जा रहा है कि कटाई के बाद जो सैकड़ों पेड़ गायब हुए हैं उन्हें आसपास के गांव वाले चोर कर ले गए हैं।

एमपीआरडीसी और वीआरएस की लापरवाही से दोनों के कर्मचारी और अधिकारियों द्वारा आरबी टिम्बर्स से मिलीभगत कर लाखों के पेड़ों का गोलमाल किया जा चुका है। इससे शासन को लाखों की चपत लग चुकी है।

यह एक जांच का विषय है कि अब तक एमपीआरडीसी और वीआरएस कंपनी द्वारा बाकी के बचे कुछ कटे हुए पेड़ों को क्यों अब भी वन विभाग से सत्यापन कराकर गर्रा डिपो में जमा नहीं किया जा रहा है। फिलहाल आरबी टिम्बर्स, एमपीआरडीसी और वीआरएस कंपनी के पास इस संबंध में कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं है।

रिपोर्ट: रितेश सोनी

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