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सतना में लगातार हो रहे अवैध निर्माण, राजस्व विभाग के अधिकारी बने तमाशबीन

सतना। ऊंचेहरा का अतिक्रमण यूं तो जिलेभर में सुर्खियों में हर वक्त रहा है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति यहां होती है, लेकिन अचार संहिता के दरम्यान जमकर निर्माण कार्य के साथ राजस्व विभाग की जमीनों की खरीदी बिक्री हुई। ऐसा नहीं तहसील महकमा समेत अनुविभागीय कार्यालय के कानों तक यह आवाज नहीं पहुंचती। सूत्रों की मानें तो एसडीएम आफिस में बैठे बाबुओं और हल्का पटवारी तहसील अमला समेत नगर परिषद की मिलीभगत से हर रोज सैकड़ों मकान बन रहे हैं। ऐसा भी नहीं कि जिनके आवास बन रहे हैं वह भूमिहीन हैं शासकीय पदों में अशीन एवं पूंजीपतियों के आशियाना इन अराजियों में धड़ल्ले से बन रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस का सिफूगा होता है। जमकर अमलों द्वारा राशि वसूली जाती है। ज्ञात हो, कुछ समय पहले के तत्कलीन एसडीएम एलएल यादव ने तबातोड़ कार्रवाई की थी लेकिन बाद में फिर उसी तर्ज पर शासकीय अराजियों को बेचने खरीदने का कारोबार फल फूल रहा है।

गरीबों की आड़ में फल-फूल रहा जमीनों का धंधा

अमूमन पूरे प्रदेश में थाना और व्यवहार न्यायालय एवं कॉलेज प्रमुख मार्गों पर बने हुए हैं लेकिन ऊंचेहरा तहसील में अंधेर नगरी चौपट राजा की कहानी चरितार्थ है। जहां जंगल की पथरीली जमीन पर तमाम कार्यालयों का निर्माण हुआ। जबकि हजारों एकड़ भूमि सतना, मैहर, नागोद और ऊंचेहरा मार्ग पर आज भी है, जिनके पास पट्टों सहित निजी स्वामित्व की आराजिया होने के बाद भी शासकीय भूमियों में कब्ज कर अवैधन निर्माण के साथ जमीनों की खरीदी बिक्री का कारोबार जोरों के साथ गरीबों की आड़ में फल-फूल रहा है।
कार्रवाई कर कौन नौकरी दांव पर लगाए ?

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विभागों के कर्मचारियों से जब भी इस संबंध में चर्चा या नगर वासियों द्वारा शिकायत की जाती है, तो सीधा जवाब होता है कि कौन अपनी नौकरी दांव पर लगाए? क्योंकि अतिक्रमणकारियों को ऊपर से नीचे तक संरक्षण प्राप्त होता है। नाम न छापने की शर्त पर राजस्व अमले के कर्मचारी ने बताया कि शासकीय भूमियों पर अब तो बड़े-बड़े कारखानों समेत गोडाउन का निर्माण भी हो चुका है, पहले कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन बाद में हमपर जबरजस्त दवाब बना। जिसकी वजह से कार्रवाई रोकनी पड़ी। आखिर किनकी सह पर शासकीय अराजियों पर अवैध निर्माण का गौरखधंधा फल-फूल रहा है। यहां तक कि सेवा सहकारी समिति मर्यादित ऊंचेहरा का प्रस्तावित भवन एवं गोडाउन सालों बाद भी नहीं चालू हुआ है। यहां तक कि अतिक्रमणकारियों ने संबंधित विभाग के इंजीनियर स्टॉप समेत कर्मचारियों को खदेड़ चुके हैं। जिसकी लिखित सूचना अनुविभागीय कार्यालय समेत थाना ऊंचेहरा में दी गई, लेकिन लेआउट आज तक नहीं पड़ सका। उक्त फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। जब प्रस्तावित भवनों का निर्माण शासन प्रशासन नहीं करवा पा रहा है तो पूरे तहसील में कैसा आलम व्याप्त होगा, अंदाज लगाया जा सकता है

इनका कहना है
तहसील मुख्यालय में सिर्फ गरीब किसानों के लिए नियम कानून हैं, लेकिन ओहदे वालों के लिए सब माफ की कहानी व्याप्त है-अमन सिंह, तहसील निवासी

तहसील ऊंचेहरा में जिसकी लाठी उसकी भैंस की कहानी व्याप्त है। पूंजीपति सहित शासकीय पदों में अशीन लोग नित नया निर्माण करवा रहे हैं कोई देखने सुनने और कार्रवाई करने वाला नहीं है- संजय बंसल
रिपोर्ट: रूप सिंह हरबोल

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