Loksabha elections2019
News_Special मध्य प्रदेश

पैराशूट उम्मीदवार को कांग्रेस का इंकार, क्या हिना देंगी ‘हाथ’ का साथ या करेंगी भीतरघात ?

बालाघाट। कांग्रेस ने बालाघाट-सिवनी लोकसभा क्षेत्र के लिए अपने अधिकृत प्रत्याशी मधु भगत के नाम पर मुहर लगा दी है। तमाम दावेदारों ने इसे सहज स्वीकार भी कर लिया है, लेकिन विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कांवरे क्या हाथ का साथ देंगी या फिर भीतरघात कर अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी की जीत की राह में मुश्किले पैदा करेंगी। यह तो 25 मई को आने वाले चुनाव परिणाम के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल राजनितिक गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि लोकसभा कांग्रेस प्रत्याशी मधु भगत को भाजपा प्रत्याशी के साथ-साथ अपनी ही पार्टी के भीतरघातियों से भी अंतिम समय तक कड़ा मुकाबला करना पड़ेगा। अभी तो मधु भगत को टिकट प्राप्ति के बाद टिकट ना मिलने से नाराज दावेदार और उनके समर्थक व कार्यकर्ताओं के बीच जाकर मान-मनौव्वल करना पड़ सकता है।

विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कांवरे द्वारा अपने छोटे भाई पवन कांवरे को टिकट दिलाने के लिए तमाम राजनीतिक हथकंडे अपनाने के बाद भी पार्टी हाईकमान ने पैराशूट उम्मीदवार बनाने से इंकार कर दिया। अब हिना गुट पवन कांवरे को टिकट नहीं मिलने से अंदर ही अंदर अच्छा खासा नाराज नजर आ रहा है। जिसके कारण यह संभावना बनती प्रतीत हो रही है कि यह गुट गुटबाजी को बढ़ावा देते हुए भीतरघात को जन्म दे सकता है, और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकता है। कांग्रेस हाईकमान को चाहिए कि वो इस आम चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण सीट बालाघाट-सिवनी लोकसभा में अपनी पैनी नजर रखते हुए भीतरघात की संभावनाओं को पनपने से पहले ही इसका निराकरण निकाल लें ताकि भाजपा हमेशा की तरह इसबार भी कांग्रेस की कमजोरियों का फायदा ना उठा सके।

लोकसभा चुनाव मुख्यत प्रत्याशी से ज्यादा कार्यकर्ता और संगठन पर निर्भर करता है क्षेत्र बड़ा होने की वजह से यह चुनाव पार्टी कार्यकर्ता ही लड़ते हैं। कांग्रेस के पास लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की अपेक्षा संगठन भी कमजोर और कार्यकर्ता भी भाजपा के मुकाबले काफी कम है। यहां कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वह पहले अपने संगठन को मजबूत करें और अपने सारे कार्यकर्ताओं को एक सूत्र में पिरोकर एक करें। यह काम भी प्रत्याशी को अपनी मेहनत से करना होगा। क्योंकि कांग्रेस के जिला अध्यक्ष निष्क्रिय रहने के साथ-साथ संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच भी नजर नहीं आते हैं। इनके नेतृत्व में कांग्रेस संगठन में काफी बिखराव आया है और संगठन काफी कमजोर हुआ है।
वर्तमान परिस्थितियों में लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के सामने भारी चुनौतियां सिर उठाए खड़ी है। अब देखना होगा कि इस आम चुनाव को लेकर कांग्रेस कितनी मुस्तैदी से अपनी चुनावी तैयारी करते हुए अपने मुख्य प्रतिद्वंदी को टक्कर दे पाती है।

पढ़ें: बालाघाट में व्यक्ति विशेष और सामाजिक टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन, अखबार की प्रतियां जलाईं

रिपोर्ट: रितेश सोनी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *