मध्य प्रदेश

सावन के पहले सोमवार को मंदिरों में शिवभक्तों का भीड़, भोलेबाबा के जयकारों से गूंजा मंदिर

बालाघाट। ऐसा माना जाता है की श्रावण मास का यह दिन भगवान शिव का प्रिय माह होता है । पुराणों के मुताबिक इस माह में समुद्र्र मंथन से निकला विष को शिव ने ग्रहण किया था। और वे विष की अग्नि को शांत करने परेशान थे।

तब उनका उपचार घी, जल, दही, शहद गंगाजल, बेल पाती आदि का मिश्रण से उपचार कर जहर की ज्वाला को शांत किया गया था तब से आज तक इस माह भगवान शिव को पुरे माह विभिन्न उल्लेखित सामाग्रियों से अभिषेक कर परंपरा को निभाई जाती है।

ऐसी मान्यता भी है कि इस दिन विवाहिता शिव की पुजा कर सात जनमो तक उसी पति को पाती है तथा कुवारियां मनवांछित वर पाती है।

जिले में कई आकर्षक मनमोहक शिवधाम है जिसकी अपनी किंवदतियां जो आज भी प्रचलित मानी जाती है । जिले के प्रषिद्ध शिव मंदिरो में लांजी का कोटेश्वर धाम, गर्रा स्थित शिव मंदिर जहां पर लोगो की अपार श्रद्धा है लोग बडे सवेरे से ही मंदिर में शिव को अभिषेक करने पहुंच जातें है।

देवों के देव महादेव के दर्शन करने जन सेलाब उमड़ रहा है तो वहीं दीनदयाल पुरम कालोनी स्थित शिव मंदिर में भी भजन किर्तन रामायण पाठ का आयोजन किया जा रहा है। वैसे तो श्रावण माह का महीना ही बड़ा पवित्र माना जाता है।

पुरे माह कोई ना कोई धार्मिक आयोजन होता ही रहता है। इसी माह के अंत में अंतिम श्रावण समाप्ति के बाद रक्षा बंधन पर्व भी आ रहा है।

जो बहनों के लिये उपहारों वाला होता है पूरे वर्र्ष इस पर्व की प्रतिक्षा बहनों को होती हैं। इसिलिये भी यह माह बेहद खास माना जाता है। वही पुराणो के मुताबिक इस माह श्री कृष्ण ने रास रचाया था ।

अपनी गोपियों के साथ वृंदावन महारास रची थी । वही स्वास्थ्य के प्रतिसावधानी एंव मौसम के बदलते परिवर्तन वाला माह होता है। जिसका उपचार पुराने समय में लोग गुड, भांग ,शहद आदि का सेवन कर मौसम के अनुरूप रहने की प्रेरणा उस समय दिया जाता रहा हैं ।

श्रावण माह वैसे तो प्रकृति से करीब रहने का माह होता है जिसके कारण इस माह में लोग पेड आदी लगाते है और प्रकृति जूडते है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *