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बालाघाट में परिवहन और बारदानों की किल्लत से धान खरीदी बंद, किसान परेशान

बालाघाट। जिले के 165 धान खरीदी केन्द्रों में परिवहन और बारदानों की किल्लत चल रही है, इस वजह से 6 दिसंबर से लगभग सभी केन्द्रों में धान खरीदी बंद हो चुकी है। ऐसे में अपनी धान बेचने के लिए किसान रात दिन एक कर रहे हैं और अपना काम छोड़कर सोसाइटियों के चक्कर काट रहे हैं। जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के इतिहास में पहली बार इस तरह की स्थिति जानबूझकर पैदा की गई है। बीते 15 दिनों से जिले के किसान अपने घर और खलिहानों में धान रखकर उसकी रखवाली कर रहे हैं। चंद दिन पहले हटाए गए जिले के कलेक्टर डी.व्हीं सिंह ने भी इस मामले में कभी कोई गंभीरता नहीं दिखाई। जिसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं।

कई ऐसे केन्द्र हैं जिन्होंने अपने रिस्क पर परिवहन की व्यवस्था न होने पर भी सिर्फ आश्वासन के आधार पर धान खरीदी तो शुरू कर दी थी, लेकिन धान खरीदने के बाद अब उन धान खरीदी प्रभारियों के सामने परिवहन की समस्या आ गई है। उन्होंने जो धान खरीदा है उस पर परिवहन न होने की वजह से सूखे की मार अलग पड़नी है। जिले में कई तो ऐसे धान खरीदी केन्द्र हैं जिन्होंने अब तक धान का एक दाना भी किसानों से नहीं खरीदा है। जिले में धान खरीदी की तारीख 15 नवम्बर से 15 जनवरी तक कलेक्टर के आदेश पर निश्चित की गई थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर परिवहन टेंडर का पेंच फंसाकर बारदानों की किल्लत सामने ला दिए। जिसके कारण धान खरीदी केन्द्रों में खरीदी बंद पड़ी है।

खरीदी प्रभारी और किसानों के बीच अब वाद विवाद की स्थिति पैदा हो रही है। जिन किसानों का धान कुछ खरीदी केन्द्रों में आश्वासन के बाद खरीदा गया था, उस धान का परिवहन नहीं होने की वजह से उन किसानों का भुगतान भी 1 माह से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी नहीं हो पाया है। सरकारी आदेश है कि धान बेचने के 1 सप्ताह के अंदर किसानों का भुगतान हो जाना चाहिए और खरीदी केन्द्रों में धान खरीदी के 3 दिन के अंदर परिवहन होना आवश्यक है। लेकिन बालाघाट जिले में सरकार कांग्रेस की बन सकती है, यह देखकर जानबूझकर इस साल कलेक्टर और पूर्व कृषि मंत्री द्वारा यह अव्यवस्था बनाई है। जिससे सोसाइटियों में और कृषक जगत में भारी आक्रोश पनप रहा है।
तत्कालीन कलेक्टर डी व्ही सिंह ने जानबूझकर ऐसी अव्यवस्था बनाई कि धान खरीदी पूर्ण रूप से चुनाव के बाद भी प्रभावित हो सके और किसान अपनी उपज मजबूरी में औने पौने दामों में व्यापारियों और बिचौलियों के बेचे। तत्कालीन कलेक्टर की ऐसी ही अनियमितता पूर्ण कार्यप्रणाली और घटिया हरकतों की वजह से उन्हें पहली प्रशासनिक सर्जरी में ही जिले से हटाकर मंत्रालय भेज दिया गया है। जहां वे कलेक्टरी नहीं अब बाबू गिरी करेंगे।

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बता दें कि धान खरीदी को 1 माह 8 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है इसके बावजूद भी अब तक विगत वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत किसानों से भी अब तक खरीदी नहीं की जा सकी है। जिले में परिवहन के साथ साथ बारदानों के अभाव में खरीदी बंद है और दिन बीतते जा रहे हैं। शासकीय आदेश के अनुसार 15 जनवरी को धान खरीदी केन्द्र किसानों के लिए बंद कर दिए जाएंगे। लेकिन इस मामले में पूर्व कृषि मंत्री और बालाघाट विधानसभा क्षेत्र के विधायक गौरीशंकर बिसेन भी कुछ स्ष्पष्ट नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर कब तक खरीदी केन्द्रों में परिवहन और बारदानों की व्यवस्था की जा सकेगी। इधर हजारों की तादात में किसान अपनी धान की ढेरी के साथ खरीदी केन्द्र में बारदाने आने का इंतजार कर रहे हैं। खरीदी केन्द्र प्रभारियों द्वारा परिवहन और बारदानों के लिए अपने नोडल अधिकारियों को सैकड़ों बार अवगत करा दिया गया है। अब कब तक खरीदी केन्द्रों में सुचारू रूप से समर्थन मूल्य पर किसानों की धान की खरीदी होगी यह अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाया है।

रिपोर्ट: रितेश सोनी

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