Protest
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बालाघाट में व्यक्ति विशेष और सामाजिक टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन, अखबार की प्रतियां जलाईं

बालाघाट। नगर मुख्यालय के हनुमान चौक में कई समाज के लोगों ने एकत्रित होकर एक अखबार के विरोध में प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की, उस अखबार की प्रतियां जलाई। प्रदर्शन कर रहे विभिन्न सामाजिक बंधुओं ने बताया कि 17 और 18 मार्च को जबलपुर से प्रकाशित एक स्थानीय अखबार ने समाज विशेष और पंवार समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए समाचार प्रकाशित किया था, जिसको लेकर पंवार समाज के साथ-साथ अन्य समाज के सामाजिक लोगों की भी भावनाएं आहत हुई हैं। उसके विरोध में यह प्रदर्शन किया गया है। कांग्रेस के दोनों संभावित पंवार समाज के उम्मीदवारों की विचारधारा सर्व समाज को साथ लेकर चलने की है, लेकिन उनके समाज और उनके लिए की गई टिप्पणियां आपत्तिजनक, भ्रामक ही नहीं है बल्कि यह सामाजिक फूट डालने की कोशिश भी की गई थी। जो विभिन्न समाज के जागरूक बंधुओं के कारण नाकामयाब हो गई।

बिरसा ब्रिगेड ने किसी के विरोध में नहीं की कोई टिप्पणी
विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल हुए बिरसा ब्रिगेड के आदिवासी पदाधिकारियों ने बताया कि विगत दिनों एक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार में बिरसा ब्रिगेड का उल्लेख करते हुए लिखा गया था कि पंवार समाज के नेता को प्रत्याशी बनाया जाता है तो बिरसा ब्रिगेड इसका विरोध करेगा, बदले में अपना प्रत्याशी भी उतारेगा, यह समाचार पूरी तरह से गलत और झूठा है क्योंकि बिरसा ब्रिगेड द्वारा ना ही किसी को ऐसा कोई बयान दिया गया, ना ही इस तरह की कोई टिप्पणी की गई है। बल्कि बिरसा ब्रिगेड कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी शेषराम राहंगडाले, मधु भगत के साथ खड़ा है, सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने और अपने परिवार के सदस्य को टिकट दिलाने व समाज में फूट डालने और प्रबल दावेदार की टिकट कटवाने के लिए ऐसे भ्रामक और गुमराह करने वाली खबरें साजिश के तहत प्रकाशित करवाई गई हैं।

जिले की राजनीति में जातिवाद की आग भड़काने की कोशिश के पीछे मकसद क्या?
वर्तमान में राजनीतिक और जातिगत समीकरण बदले हैं, इसी बदले हुए माहौल में परिवारवाद से पीड़ित कुछ राजनीतिज्ञ जातिवाद की राजनीति को रंग देते हुए सामाजिक फूट डालने की कोशिश में लगे हुए हैं। यह राजनीतिज्ञ जातिवाद की राजनीति प्रकाशित प्रचारित करवाकर अपना राजनीतिक का उल्लू सीधा करना चाहते हैं, समाज को जातिवाद का रंग देकर सामाजों में दीवार खड़ी करना चाह रहे हैं। अपनी राजनीतिक गोटी साचे में ढालने की चाह पाल रहे हैं, परिवारवाद से ग्रसित यह राजनीतिक परिवार जिले की जनता को गुमराह कर फूट डालो औ राज करो की नीति पर चल पड़ा है। इसके पीछे का मकसद भ्रामक प्रचार कर योग्य संभावित उम्मीदवारों की प्रबल दावेदारी को निरस्त करवाकर खुद के परिवारिक सदस्य को पार्टी का टिकट दिलाना है। लेकिन कई समाज के जागरूक लोगों की सक्रियता और समझदारी के चलते यह साजिश नाकामयाब होती हुई दिखाई दे रही है।

इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से बिरसा ब्रिगेड के पदाधिकारियों के साथ नवीन चौधरी, संजय गौतम, अजय बिसेन, महेन्द्र कटरे, पूनम टेंभरे, महेन्द्र बिसेन, राजेन्द्र तुरकर, रमेश धुर्वे (बिरसा ब्रिगेड संरक्षक), लालसिंह टेकाम, बलराम उईके, अलील उईके, लाभसिंह मरावी, रमेश उईके, बेनीराम हट्टेवार, शिवम विश्वकर्मा, जीतू, धनेन्द्र पंचेश्वर, विजेन्द्र ग्वाले, अंजीलाल बघेल, रफीक खान, भूरू पटेल, धनराज तिलासे, रमेश मेश्राम, मनोज बोरीकर, कन्हैया गौतम, राजाभाई, मुकेश बघेल, सोनू कटरे, भीम वाहने, रमेश पारधी, प्रकाश गनवीर समेत अन्य लोग शामिल थे।
रिपोर्ट: रितेश सोनी

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