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कभी कुश्ती न हारने वाला ज़िंदगी से हार गया, मध्यप्रदेश केसरी ने रिंग में तोड़ा दम

सिवानी। जिले का 17 वर्षीय सोनू, जो पहलवान जगत में मध्यप्रदेश केसरी के नाम से जाना जाता था। उसके बारे में चर्चाएं हैं कि उसने कभी दंगल के रिंग में हार नहीं मानी, एक के बाद एक कई कुश्ती जीतने में जिसका रिकॉर्ड महाकौशल क्षेत्र में कोई तोड़ नहीं पाया था, जीत जिसका जुनून था, कुश्ती जिसकी ज़िंदगी थी, उसने दंगल के रिंग में लगातार चार कुश्ती जीतीं और पांचवीं कुश्ती में वो जिंदगी से ही हार गया।

मध्यप्रदेश ने पहलवान जगत का एक नया उभरता हुआ सितारा खो दिया, जिस वक्त मौत ने उसे गले लगाया उस वक्त भी वो हज़ारों पहलवानों और दर्शकों को कुश्ती के दांव-पेंच दिख रहा था, उसे क्या पता था कि वो इस दंगल की अपनी आखरी कुश्ती लड़ रहा है। लगातार चार पहलवानों को मात देने के बाद पांचवीं कुश्ती में भी बढ़त बढ़ाए हुआ था, पर अचानक कुछ ऐसा हुआ कि उसकी आंखों मे अंधेरा छा गया और उसका गठीला गर्म जिस्म ठंडा पड़ने लगा। जब तक कोई इस बात को समझ पाता उसने अपने प्राण त्याग दिए। उसे साथियों द्वारा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

सिवनी के इस चहेते पहलवान की ये आखिरी कुश्ती थी, जिसे देखने मध्यप्रदेश ही नहीं महाराष्ट्र-छतीसगढ़ के भी लोग आए थे, इस ह्रदयविदारक घटना ने सबको सहमा दिया। सोमवार को सोनू पहलवान का सिवनी जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। सैकड़ों लोगों ने पहुंच कर श्रद्धांजलि दी। सोनू पहलवान को एक शहीद की तरह श्रद्धांजलि दी गई। उसकी शवरथ को फूलों से सजाया गया और सिवनी केवलारी विधाक समेत समस्त पहलवान कुश्ती संघ जनप्रतिनिधियों ने अंतिम विदाई दी।
रिपोर्ट: अब्दुल क़ाबिज़ खान

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