Tribute to Guru Rajarajeshwari
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नम आंखों से ब्रह्मलीन अपने गुरु को शिष्यों ने दी श्रद्धाजंलि, पढ़ें कैसे इस जगह से जुड़े ?

उंचेहरा। श्री श्री 108 श्री परम पूज्य गुरु राजराजेश्वरी आदि शक्ति के उपाशक नरहरि पुरुषोत्तम शरण शर्मा जी के ब्रह्मलीन होने की खबर मिलते ही शिष्य मंडल में शोक की लहर दौड़ गई। उत्तराखंड की पावन भूमि में जन्मे गुरु जी का संबंध शिक्षा की वजह से सतना जिले की सरजमी से रहा है। जहां उन्होंने आदिशक्ति की उपासना के साथ ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए मां शारदा धाम मैहर में शक्ति पीठ की स्थापना साथ ही 18 वर्षो तक तपस्या की।

कैसे हुआ जुड़ाव

राजरजेश्वरी के उपाशक पूज्य शन्त 1958 के दशक में इंग्लिश विषय से शिक्षा ग्रहण की तदुपरांत अंग्रेजी विषय में प्रोफेसर के पद में अमरपाटन में नियुक्ति 1962 के दशक में हुई। 1992 तक के सफर में वह जैतवारा उंचहरा में प्राचार्य एवं बीईओ जैसे पद पर रहे। इसी दरम्यान उन्होंने आदि शक्ति की साधना की उपासना में खलल नहीं पड़ने दिया। इस वजह से उन्होंने शासकीय नौकरी से इस्तीफा दिया, लेकिन शिक्षण कार्य से जुड़े रहे। जात धर्म की जंजीरों को भी उन्होंने तोड़ा उनके सानिध्य में शिक्षा ग्रहण करने वाले शिष्य हिन्दू मुस्लिम आज मुकाम हासिल कर चुके हैं। वहीं से उनके शिष्यों का काफिला बढ़ता गया। जिसकी वजह से जैतवारा, सतना, मझगांव, उंचेहरा, अमरपाटन, मैहर, रामपुर बघेलान, नागोद पन्ना समेत विभन्न जगहों पर उनका आभा मंडल आज भी मौजूद है। 90 वर्ष के लंबे जीवन काल में उनके प्रिय भतीजे आस्टिरियोलॉजियाजिस्ट ज्योतिष मर्मम अरुण द्विवेदी उनको अपने साथ उत्तराखंड की पावन भूमि काशीपुर उधम सिंह नगर वापस ले गए। वहां भी उन्होंने महारानी राजरजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी महारानी की उपासना कर अपने घर में भी शक्ति पीठ की स्थापना की। इस दौरान पूरे भारत वर्ष से उनके अपने शिष्य वहां जाने लगे। शिष्यों का प्यार देख गुरु भगवान उंचेहरा, जैतवारा मैहर, प्रवास में आते थे। जहां डॉक्टर शुशील गुप्ता हर प्रसाद ताम्रकार, जगन्नाथ सोनी के यहां रह कर पूजा पाठ के साथ अपने शिष्यों को आशीर्वाद देते रहे।

कमाया हुआ वैभव शिक्षा के क्षेत्र में व्य किया

परम पूज्य श्री श्री 108 श्री गुरुवार नरहरि पुरुषोत्तम शरण शर्मा ने जैतवारा के प्राइवेट विद्यालय में स्कूल कक्ष का निर्माण के साथ बाउंड्री बाल बनवाई तो शमशान घाट का बाउंड्री बाल का निर्माण आज तक प्रेरणना बना है। सतना के भर्जुना बर्दाडीह के पुरातन सिद्ध स्थल राधा कृष्ण मंदिर का जीर्णोद्धार व प्रमुख द्वार आज प्रेरणना दाई है। साथ ही कई शिष्यों की पढ़ाई उन्होंने करवाई है, जिसमें हरिजन आदिवासी समेत विभिन्न धर्मों के लोग शामिल हैं। उंचेहरा शिष्य मंडल से उनका गहरा लगाव था। उन्हों ने पूर्व से ही कह रखा था मनुष्य का शरीर खाक होता है। आत्मा अजर अमर है अपने शिष्यों के दिलो में ताउम्र जिंदा रहूंगा। ऐसे अंगिनत चमत्कारी प्रसंग उनके जीवन से जुड़े हुए है।

श्रद्धाजंलि में इनकी रही मौजूद

अपने गुरु के विष्मार्निय पलों को याद कर हरीश पैलेश सभागार में मौजूद शिष्यों की आंखें नम हुईं। उनका दशवा और पगड़ी रस्म 26 सितंबर को ग्रह ग्राम काशीपुर उधम सिंह नगर में होगी। 27 सितम्बर को अस्थि विसर्जन कार्यक्रम राम धुंन संगीत के साथ हरिद्वार में होगा। श्रद्धाजंलि देने वालो में प्रमुख रूप से मदनकांत पाठक, डॉक्टर शुशील गुप्ता हरीश ताम्रकार, हर प्रसाद ताम्रकार, बल्ली प्रसाद समदरिया, डॉक्टर अशोक समदरिया, महेश शर्मा, विनय ताम्रकार, संतोष भारतीय, कैलाश ताम्रकार, सुरेश पाठक, संजय ताम्रकार, मकसूदन प्रसाद पांडेय, जगनन्नाथ सोनी, सतीश कुमार गुप्ता, ललित सोनी, डॉक्टर रंजीत समदरिया, राजेश ताम्रकार,अन्नू पांडेय, अरुण कुमार पांडेय रानी ताम्रकार, ध्रुव ताम्रकार दिनेश पांडेय, प्रकाश चंद्र पांडेय, समेत सैकड़ों की शिष्यों ने नम आंखों से अपने गुरु को श्रद्धाजंलि दी कार्यक्रम रात्रि 8 बजे से प्रारम्भ होकर 10 बजे रात्रि तक चलता रहा।

रिपोर्ट: रूप कुमार हरबोल

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