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पंचायती रायल्टी की आड़ में करोड़ों की रेत चोरी, शासन को लग रहा चूना

बालाघाट। प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायतों में हो रहे निर्माण कार्य के लिये प्रदान की गई रायल्टी की आड में रेत माफिया करोड़ों की रेत बिना रायल्टी चुकाये डम्प करके शासन को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं। प्रशासन से मिली रायल्टी के नाम पर यह रेत माफिया न केवल अवैध उत्खनन कर रहा है बल्कि रेत का अलग स्थान पर भंडारण भी किया जा रहा है। जल संसाधन सर्वेक्षण विभाग के द्वारा उकवा के पास ग्राम पचामा में पचामा डेम 9 करोड़ की लागत से श्रीराम कंट्रक्शन कंपनी ग्वालियर को ठेका देकर निर्माण किया जा रहा है। जिसमें पचामा डेम का लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा का कार्य कंपनी द्वारा पूरा किया जा चुका है बाकी कार्य प्रगतिरत है। इसी डेम के नाम से बिरसा ब्लाक की सोन नदी से रोज सैकड़ों ट्रालियां रेत लाई जा रही है जिसे बिरसा,बैहर,उकवा,परसवाड़ा के क्षेत्रों में 2 हजार से 3 हजार रूपये ट्राली तक प्रायवेट में बेचा जा रहा है। जिस जगह से यह रेत का अवैध उत्खनन और भंडारण किया जा रहा है वह ग्राम पंचायत लहंगाकन्हार के अंतर्गत आता है और ग्राम पंचायत को 1.25घन मीटर के हिसाब से प्रशासन से रायल्टी स्वीकृत हुई है।

इसी रायल्टी की आड लेकर श्रीराम कंट्रक्शन कंपनी ग्वालियर के पार्टनर सुदामा शर्मा द्वारा पोकलेंड मशीने लगाकर सोन नदी के पास वाले घाट में नदी से रेत निकालकर भंडारण किया जा रहा है और इसी रेत के भंडारण से डेम के लिये रेत भेजी जाती है और प्रायवेट में बेची भी जाती है। जिसकी पूरी रायल्टी ग्राम पंचायत को नहीं दी जाती और न ही ग्राम पंचायत जितनी ट्राली रेत नदी से निकाल रहे हैं उसकी रायल्टी प्रति ट्रक के हिसाब से मायनिंग को दे रहे हैं। इस रेत की कालाबाजारी और अवैध उत्खनन में जिला खनिज अधिकारी लहंगाकन्हार सरपंच और श्रीराम क न्ट्रक्शन कंपनी के सुदामा शर्मा की मिली भगत शामिल है। जिसकी वजह से शासन को करोड़ों का चूना हर माह लग रहा है वहीं मनमानी तरिके से रेत खनन होने के कारण सोन नदी को भी नुकसान पहुंच रहा है।

इस संबंध में जिला खनिज अधिकारी को भी अनेकों बार अवगत करा दिया गया है लेकिन उनके द्वारा अभी तक कोई उचित कार्यवाही नहीं की गई है। जबकि नियमानुसार ग्राम पंचायत को रायल्टी स्वीकृत हुई है जिसमें रेत निकालकर उसे कार्यों के लिये रायल्टी चुक्ता कर दिया जा सकता है लेकिन रेत का भंडारण नहीं किया जा सकता। रेत के भंडारण की स्वीकृति प्रशासन द्वारा नहीं दी गई है। फिर भी प्रतिदिन यहां से 200 से 300 ट्राली रेत का भंडारण दिन में किया जाता है और शाम से रात तक इस भंडारण से परिवहन किया जाता है। जिले के खनिज विभाग और जिला खनिज अधिकारी के कार्यप्रणाली का आलम यह है कि जब इस बात की शिकायत उनसे करते हुये इस संबंध में आगे की कार्यवाही के लिए उनका बयान लेने बात की गई तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुये कहा कि जब हमारे पास समय रहेगा तब देखेंगे।

जिला खनिज अधिकारी द्वारा इस बात को अवैध रेत उत्खनन में लगे रेत माफियाओं को बताकर इस मामले की पड़ताल करने वाले पत्रकार को धमकी दिलाई जाती है। हालांकि इस संबंध में खनिज मंत्री प्रदीप गुड्डा जायसवाल से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन लगातार कई बार तीन दिनों तक फोन करने के बाद भी उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

रिपोर्ट: रितेश सोनी

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