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‘सीएम साहब’ आपकी पुलिस तो जुआ की ‘शौकीन’ है, जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई: विशाल बिसेन

बालाघाट। जिला पुलिस अधीक्षक जयदेवन ने 13 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया और चार एस एफ के जवानों को निलंबन के लिए उनकी कमांडेंट को पत्र लिखा।

इन पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का कारण जुआ खेलते पकड़े जाना बताया जा रहा है। निश्चित ही पुलिस अधीक्षक की है कार्रवाई अच्छी है। लेकिन इस कार्रवाई में दर्जनों सवाल भी उठ रहे हैं।

जब पुलिसकर्मी जुआ खेलते पकड़ाए तो उन पर जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्यों गुपचुप तरीके से उन्हें निलंबित कर दिया गया।

जिस स्थान पर जुआ खेलते पकड़े गए हैं, उस स्थान के मालिक पर क्यों नहीं कार्रवाई की गई। मतलब साफ है कि जिस साहब के बंगले में जुआ खेलते पकड़े गए हैं, उन साहब पर भी क्यों नहीं कार्रवाई की गई।

जैसा की पुलिस द्वारा जुआ खिलाने वाले स्थान के मालिक पर कार्रवाई की जाती है। बीते दिनों पुलिस द्वारा जिले के बिरसा, लामता और बालाघाट में जुआ खेलते हुए पकड़े गए लोगों पर जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।

जिस जगह पर जुआ खेला जा रहा था, उस पर भी कार्रवाई की गई थी। पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई से निश्चित ही कई सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी तरफ एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि पुलिसकर्मियों ने बड़े साहब के बंगले को जुआ का अड्डा बना रखा था।

तभी तो ड्यूटी पर तैनात 6 पुलिसकर्मी और जुआ खेलते पकड़े गए 13 पुलिसकर्मी तो क्या पुलिस कर्मियों द्वारा लंबे समय से साहब के बंगले पर जुआ खेला जा रहा था।

इसे बड़ा ही सुरक्षित जुआ का अड्डा बना लिया गया था। इस कार्रवाई में इस बात का खुलासा स्पष्ट रूप से हो रहा है कि साहब का बंगले को सुरक्षित जुआ अड्डा बना लिया गया था।

इसलिए तो कोतवाली में तैनात जवान भी साहब के बंगले पर जुआ खेलते मिलता है। अन्य स्थान पर तैनात पुलिसकर्मी भी जुआ खेलते पकड़े जाते हैं।

बालाघाट जिला कांग्रेस प्रवक्ता विशाल बिसेन ने आरोप लगाते हुए कहा कि तत्काल पुलिसकर्मियों पर की गई कार्रवाई का खुलासा कर किए जाना चाहिए था।

जुआ एक्ट के तहत पकड़े गए पुलिसकर्मियों पर उचित कार्रवाई करने और जिस साहब के बंगले पर जुआ खिलाया जा रहा था उनका नाम का खुलासा किया जाए।

या फिर इन पुलिसकर्मियों पर किस कारण से कार्रवाई की गई है, इस बात का खुलासा किया जाए। जिस साहब के बंगले में जुआ खेला जा रहा था, नियमानुसार उस पर भी कार्रवाई की जाए।

यदि पुलिसकर्मियों पर किसी अन्य कारण से कार्रवाई की गई तो उस बात का भी खुलासा किया जाए कि उन पर किस कारण कार्रवाई की गई है।

अगर बात सही है कि पुलिसकर्मी जुआ खेलते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने के कारण कार्रवाई हुई है। तो पुलिस उनके नाम का भी खुलासा करे।
फोटो भी प्रकाशित करने के लिए समाचार पत्रों में भेजी जाए। जिससे जनता को पता चले कि उनके रक्षक जुआ के शौकीन है। क्योंकि पुलिस द्वारा बीते दिनों जुआ खेलते पकड़े गए लोगों के नाम और फोटो भी प्रकाशित किए गए थे।

तो अब अपने कर्मचारियों को क्यों बचाया जा रहा है। इस मामले की शिकायत निर्वाचन आयोग को करने की योजना बनाई जा रही है जिससे नक्सल प्रभावित जिले में आगामी विधानसभा चुनाव 2018 शांतिपूर्ण तरीके से निष्पादित किया जा सके।

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