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राजस्थान में हरित पहल… पंप स्टोर पावर स्टेशन से अब सस्ती, ग्रीन बिजली मिलेगी, पीक आवर में 200 मेगावाट बिजली बनेगी

राजस्थान में पहली बार बांधों, जलाशयों पर पंप स्टोर पावर स्टेशन तकनीक से बार-बार बिजली बनाई जाएगी। शुरुआत चंबल नदी के जवाहर सागर बांध से करने की तैयारी है।

इससे पीक आवर में लगभग 200 मेगावाट तक बिजली बन सकेगी। ज्यादा मांग या संकट होने पर इस प्रोजेक्ट से तुलनात्मक रूप से सस्ती और ग्रीन बिजली सप्लाई की जा सकेगी। हालांकि इसकी योजना 1985 में ही बनाई गई थी।

अब प्रदेश में बिजली संकट और ग्रीन एनर्जी को लेकर सरकार का दबाव पड़ा तो प्रोजेक्ट को अमल में लाने की तैयारी शुरू हो गई। हाल में विद्युत उत्पादन निगम के अधिकारियों ने चंबल नदी के जवाहर सागर के इलाके को देखा, जहां पर पंप स्टोर पावर स्टेशन लगाया जाना है।

राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम के सीएमडी आरके शर्मा ने बताया कि बिजली संकट के इस दौर में ग्रीन एनर्जी के रूप में सोलर, पवन और पंप पावर स्टेशन लगाने के लिए कई योजनाएं बनाई जा रही हंै। जवाहर सागर का प्रोजेक्ट इसी का हिस्सा है।

पंप से लिफ्ट करेंगे पानी, फिर भी सस्ती होगी बिजली : पंप बिजलीघर से छोड़े गए पानी को पंप से लिफ्ट कर फिर से इंटेकवेल में छोड़ेंगे तो उसमें भी बिजली खर्च होगी। फिर भी मिलने वाली बिजली तुलनात्मक रूप से सस्ती होगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि पवन ऊर्जा, सोलर ऊर्जा का अतिरिक्त इस्तेमाल कर पानी को लिफ्ट किया जाएगा। यह भी ध्यान रखा जाएगा कि ऐसे समय पंप चलाए जाएंगे, जब अतिरिक्त या सस्ती बिजली उपलब्ध होगी। पीक आवर में भरे गए इंटेकवेल में चलाकर सस्ते पनबिजलीघर से बिजली बनाएंगे। इस प्रक्रिया से लगभग 3 गुना राशि की बचत होगी। जवाहर सागर के बाद राणा प्रताप सागर और बांसवाड़ा में भी इसके लिए संभावनाएं तलाशी जाएंगी। जवाहर सागर बांध के लिए नोडल एजेंसी भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड को बनाया गया है।

देशभर ऐसे 6 पावर स्टेशन: पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में 6 पंप स्टोरेज पावर स्टेशन प्रोजेक्ट से बिजली बनाई जा रही है। वहीं अमेरिका बड़ी मात्रा में इस तरह से बिजली बना रहा है। ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञों की स्टडी में दावा किया गया है कि भारत में इसकी बड़ी संभावना है।

बिजली संकट या ज्यादा डिमांड होने पर महंगी बिजली नहीं खरीदनी होगी, 3 गुना पैसे बचेंगे
जवाहरसागर बांध का पानी छेड़ा नहीं जाएगा। वह सिस्टम पूर्ववत चलेगा। यह स्टेशन अलग से बनेगा। एक बार 4.50 लाख क्यूसेक पानी इनटेक वेल में भर कर बार-बार उसका इस्तेमाल किया जाएगा। इस पर ढाई सौ करोड़ रुपए लागत आएगी जो बिजली बनाकर सालभर में वसूल ली जाएगी।
जवाहरसागर में बनेगा अलग स्टेशन

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