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आधार सॉफ्टवेयर हैक, कहीं और भी बन सकता है आपका कार्ड, UIDAI ने बताया बेबुनियाद

नई दिल्ली। आधार कार्ड की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी खबर आई है। खबर है कि आधार के सॉफ्टवेयर को हैक कर लिया गया है। हालांकि इस खबर को यूआईडीएआई ने सिरे से खारिज कर दिया है।

आपको बता दें कि भारत में एक लंबे समय से आधार कार्ड की सुरक्षा को लेकर विवाद चल रहा है। अब आधार डेटा फिर से एक बार चर्चा में है। तीन महीने तक चले एक इन्वेस्टिगेशन में दावा किया गया है कि एक सॉफ्टवेयर पैच है जो आधार आइडेंटिटी डेटाबेस में स्टोर डेटा की सिक्योरिटी को खतरे में डाल देता है।

हफिंगटनपोस्ट डॉट इन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि आधार कार्ड का सॉफ्टवेयर हैक हो चुका है। भारत के करीब एक अरब लोगों की निजी जानकारी लीक होने का खतरा बढ़ गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार कार्ड के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी है जिसकी मदद से एक सॉफ्टवेयर के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति किसी के भी नाम से वास्तविक आधार कार्ड बना सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक पैच, जिसे यूनिक आइडेंटिफिकेशन ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) द्वारा डेवलप नहीं किया गया है, इसकी मदद से कथित तौर पर हैकर्स आधिकारिक आधार एनरोलमेंट सॉफ्टवेयर के सिक्योरिटी फीचर को बंद कर अनाधिकृत आधार नंबर जेनरेट कर रहे हैं।

सिर्फ 2,500 रुपये में यह सॉफ्टवेयर मिल जाएगा। हफिंगटनपोस्ट डॉट इन का दावा कि उसने तीन महीने पहले जांच की और फिर जांच के बाद इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया।

दुनियाभर के 5 एक्सपर्ट की मदद से रिपोर्ट को तैयार किया गया। रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अभी भी इस सॉफ्टवेयर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।

रिपोर्ट में सामने आया है कि इस सॉफ्टवेयर की मदद से आधार की सिक्योरिटी फीचर को बंद किया जा सकता है, इसके अलावा नया आधार तैयार किया जा सकता है।

यूट्यूब पर भी कई ऐसे वीडियो अपलोड हुए हैं, जिनमें एक कोड के जरिए किसी के भी आधार कार्ड से छेड़छाड़ कर नया आधार कार्ड बनाया जा सकता है।

कांग्रेस ने आधार के डेटाबेस में सेंधमारी की खबरों को लेकर कहा कि UIDAI में दर्ज लोगों के विवरण खतरे में हैं। कांग्रेस ने ट्वीट के जरिए कहा कि ‘आधार नामांकन सॉफ्टवेयर के हैक हो जाने से आधार डेटाबेस की सुरक्षा खतरे में आ सकती है।

वहीं, UIDAI ने एक बयान जारी किया है और आधार सॉफ्वेयर हैक हो जाने की खबर को बकवास बताया है। कुछ लोग जानबूझकर लोगों के मन में भ्रम पैदा कर रहे हैं।

UIDAI के मुताबिक, किसी भी डेटा को डिस्क में सेव करने से पहले जरूरी सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखा जाता है। कोई भी ऑपरेटर आधार बना या अपडेट नहीं कर सकता है। जब तक कोई निवासी खुद अपनी बॉयोमेट्रिक डिटेल उसे ना दे दे।

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