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5जी से इंटरनेट स्पीड 4जी के मुकाबले 10 गुना तक बढ़ जाएगी सितंबर से शुरू हो सकती है सेवा, 10 गुना स्पीड मिलेगी

देश जल्द एक और इंटरनेट क्रांति का गवाह बनने जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 4.3 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी को मंजूरी दे दी। नीलामी 26 जुलाई को होगी। संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इसके बाद देश में सितंबर से चरणबद्ध तरीके से अल्ट्रा हाई स्पीड इंटरनेट वाली 5जी सेवा शुरू हो सकेगी। सरकार ने पहली बार बड़ी टेक कंपनियों को उनके इस्तेमाल (कैप्टिव) के लिए 5जी नेटवर्क स्थापना को भी मंजूरी दी है।
कैबिनेट ने ट्राई की अनुशंसा वाली आरक्षित कीमतों पर नीलामी को मंजूरी दी है। ट्राई ने मोबाइल सेवाओं के लिए न्यूनतम आधार मूल्य में 39% कटौती की सिफारिश की थी। हालांकि सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने इसे ‘बेहद निराशाजनक’ करार दिया था क्योंकि टेलीकॉम कंपनियां 90% कटौती की इच्छुक थीं। संभवत: इसीलिए सीओएआई ने मंत्रिमंडल की घोषणा के बाद बयान जारी नहीं किया।
{पहले 13 शहरों में: 5जी सेवा पहले अहमदाबाद, गांधीनगर, पुणे, मुंबई, बेंगलुरू, चंडीगढ़, गुरुग्राम, हैदराबाद, जामनगर, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, दिल्ली में मिलेगी।
{6जी सेवा 2030 तक: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश में 6जी सेवाएं इस दशक के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य है।
नेटवर्क कंजेशन, बफरिंग, की समस्या खत्म होगी; डेटा के दाम बढ़ सकते हैं
{5जी स्पेक्ट्रम से मुझे क्या फायदा?
5जी से इंटरनेट स्पीड 4जी के मुकाबले 10 गुना तक बढ़ जाएगी। न केवल डाउनलोड स्पीड बढ़ेगी, बल्कि स्मार्ट होम और सिटी की कल्पना भी साकार होगी। मूवी 20 से 25 सेकंड में डाउनलोड हो सकेगी। ड्राइवरलेस कार, ऑटोमेशन तेजी से हो सकेगा। नेटवर्क कंजेशन, बफरिंग, लोडिंग समस्या खत्म होगी।
{मोबाइल डेटा का प्लान महंगा होगा?
िनजी कंपनियां अधिक महंगा 5जी स्पेक्ट्रम खरीदेंगी तो संभव है कि मोबाइल प्लान की कीमतें भी बढ़ें। हालांकि अधिक रिजर्व प्राइस से अनुमान लगाया जा रहा है कि मोबाइल प्लान महंगे होंगे।
{…लेेकिन सरकार ने तो कंपनियों को स्पेक्ट्रम खरीदी में कई राहत दी है?
स्पेक्ट्रम 20 साल के लिए नीलाम होंगे। पहली बार कंपनी को अग्रिम भुगतान की अनिवार्यता नहीं रहेगी। स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) भी नहीं लगेगा। पैसा 20 सालाना किस्तों में देना होगा। 10 साल बाद स्पेक्ट्रम लौटाया जा सकेगा, बशर्ते बकाया न हो। हालांकि कंपनियों ने फ्लोर प्राइस को अधिक बताया है।
{दुनिया के मुकाबले भारत में 5जी स्पेक्ट्रम कितना महंगा है?
देश में 5जी स्पेक्ट्रम (3.5 गीगाहर्ट्ज) की रिजर्व प्राइस 492 करोड़ रु./मेगाहर्ट्ज है। पिछले साल यूके में नीलाम स्पेक्ट्रम की कीमत 40.03 करोड़ रु. और हॉन्गकॉन्ग में 3.87 करोड़ रु. थी। मार्च 2021 में यूके में 700 मेगाहर्ट्ज का स्पेक्ट्रम 20 करोड़ रु/मेगाहर्ट्ज में नीलाम हुआ। भारत में रिजर्व प्राइस 6,568 करोड़ रुपए/ मेगाहर्ट्ज थी। भारत में सालाना कमाई के मुकाबले स्पेक्ट्रम की लागत सबसे अधिक (32%) है। चीन में 1% तो जर्मनी में 10%, यूके में 8% है।
{भारत में 4जी और 5जी मोबाइल सब्सक्राइबर कितने हैं?
लोकसभा में दी जानकारी के अनुसार देश में 115 करोड़ से अधिक मोबाइल सब्सक्राइबर हैं। 4जी मोबाइल वाले 80 करोड़ हैं। 2जी मोबाइल सब्सक्राइबर 35 करोड़ हैं। 2021 में 3 करोड़ 5जी मोबाइल बिके थे। इनमें से 1 करोड़ एक्टिव थे। भारत में साल 2026 तक 35 करोड़ 5जी मोबाइल सब्सक्राइबर होने की संभावना जताई जा रही है।
नीलामी से दूरी बना सकती हैं निजी टेलीकॉम कंपनियां
स्पेक्ट्रम की रिजर्व प्राइस अधिक होने से आशंका है कि निजी टेलीकॉम कंपनियां नीलामी से दूरी बनाएं। वहीं विश्लेषण एजेंसी इक्रा ने संभावना जताई है कि भुगतान में राहत मिलने से कंपनियां 1 लाख करोड़ रु कीमत की बोली लगा सकती हैं।
40 साल में 1 से 5जी, जापान में 6जी ट्रायल
1जी: 80 के दशक में जापान में लॉन्च। सिर्फ वॉइस कॉल होता था। रोमिंग सुविधा नहीं थी।
2जी: 1991 में आई। एनालॉग सिग्नल डिजिटल हुए। एसएमएस-एमएमएस सुविधा
3जी: 2001 में आई। मोबाइल डेटा ट्रांसमिशन स्पीड 4 गुना बढ़ी। ईमेल, मैप, वीडियो कॉल, मोबाइल में म्यूजिक आए।
4जी: 2010 में लॉन्च। हाई स्पीड, हाई क्वालिटी वाइस और डेटा सेवा।
5जी:20 गीगाबाइट्स सेकंड स्पीड। रोबोटिक सर्जरी हो सकेगी।
6जी: जापान ने 6जी का ट्रायल शुरू किया है। डेटा ट्रांसमिशन स्पीड 5जी के मुकाबले 1 लाख गुना अधिक होती है।

यूं शुरू हुईं सहूलियतें
मोबाइल कंपनियां कितनी तैयार…?: 5जी सेवा उसी रेडियो फ्रीक्वेंसी पर चलती है, जो 4जी के मोबाइल डेटा, वाई-फाई आदि के लिए इस्तेमाल हो रही है। टेलीकॉम कंपनियों को 5जी सेवा के लिए टावर में बदलाव नहीं करने होंगे। हालांकि छोटे-छोटे बहुत अधिक टावर लगाने होंगे। इससे टेलीकॉम कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। देश के 13 शहरों में टेलीकॉम कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर चुकी हैं।

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